श्रीमद्भागवत कथा के रसापान से मिलती है बुरे कर्मों से मुक्ति : पं विद्याधर भारद्वाज---

Nov 17, 2023 - 14:25
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श्रीमद्भागवत कथा के रसापान से मिलती है बुरे कर्मों से मुक्ति : पं विद्याधर भारद्वाज---

ज्ञान द्विवेदी INewsUP

 कलवारी बस्ती । कलयुग में श्रीमद्भागवत पुराण की कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। कलयुग में हरि नाम स्मरण मात्र से ही मानव रूपी जीव का कल्याण हो जाता है। यह उपदेश गुरुवार को कुदरहा विकास क्षेत्र के सुभावपुर गाँव मे चल रहे नौ दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन अवध धाम से पधारे कथावाचक पं विद्याधर भारद्वाज जी महाराज ने व्यास पीठ से व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एक दिन राजा परीक्षित शिकार करने जंगल में गए थे। वहां भूख प्यास से व्याकुल होकर शमीक ऋषि के आश्रम पहुंचे और वह जल मांग रहे थे जब उनको जल नहीं मिला तो क्रोध में आकर बगल में पड़ा मरा हुआ सर्प अपने धनुष के तीर से उठाकर शमीक ऋषि के गले में डाल दिए। ऋषि पुत्र नदी में स्नान कर रहे थे सभी ऋषियो ने उन्हें जा करके बताया कि तुम्हारे पिता जी के गले में राजा परीक्षित ने मरा हुआ सर्प डाल दिया है। क्रोध में आकर ऋषि पुत्र ने एक अंजुली जल लेकर के राजा को श्राप दे दिया और कहा कि जाओ वही मरा हुआ सर्प आज के सातवें दिन तुम्हें डस लेगा। जिसके कारण तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी। जैसे ही राजा अपने महल में जाकर मुकुट को उतारा तो वह अपने किए गए कर्मों पर पश्चाताप करने लगे कि मैंने ऋषि के गले में मरा हुआ सर्प डालकर घोर अपराध किया है मुझे तो इसकी सजा मृत्युदंड ही मिलना चाहिए। तभी ऋषि के अनुयाई पहुंच गए और बताने लगे कि आज के सातवें दिन आपकी मृत्यु हो जाएगी। राजा ने कहा मुझे मेरे इतने बुरे कर्मों का ऐसा ही दंड मिलना चाहिए था। राजा परीक्षित आनन-फानन में अपने पुत्र जन्मेजय को सिंहासन पर बैठा कर गंगा के तट पर पूजा अर्चना करने चले गए। फिर ऋषि सौनक को अपने पिछले किए गए कर्मों को बताया और पूंछा कि किए गए बुरे कर्मों का पश्चाताप कैसे किया जाए। जिनको मरने में सिर्फ सात दिन का समय शेष बचा हो तब सुखदेव जी ने प्रेम पूर्वक उनको समझाते हुए कहा कि आप श्रीमद्भागवत कथा का सात दिनों तक रसास्वादन करिए जिससे आपके बुरे कर्मों से छुटकारा मिल जाएगा। राजा परीक्षित ने आनन-फानन में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कर सात दिनों तक उसका रसपान किया कि जिससे हमारे बुरे कर्मों से मुक्ति मिल सके। निगमकल्पतरोर्गलितं फलं शुकमुखादमृतद्रवसंयुतम्। पिबत भागवतं रसमालयं मुहुरहो रसिका भुवि भावुकाः॥ कथा में मुख्य यजमान निगम नाथ उपाध्याय, यज्ञाचार्य कन्हैया शास्त्री, पूर्व प्रधान राजेंद्र उपाध्याय, अनुराग, अविनाश, दिवाकर, दीपक, ग्राम प्रधान अमरेंद्र कुमार, रामकिसुन राजभर, रमेश कुमार राजभर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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