ससुराल के बजाय मायके चली गईं सामूहिक विवाह की दुल्हनिया
ब्यूरो रिपोर्ट INewsUP
कानपुर । मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के सभी नौ आयोजनों में कुल 337 जोड़ों ने एक-दूजे का हाथ थामा लेकिन कुछ आयोजनों में ऐसा भी देखने को मिला जहां वर-वधू ने न फेरे लिए और न ही सिंदूर लगाया। स्वयं ही माला पहन ली और कुछ ही मिनटों में दूल्हा-दुल्हन रुपए और गिफ्ट लेकर चले गए। कुछ दुल्हन ससुराल की बजाय मायके चली गईं। वीडियो सामने आने पर अधिकांश लोगों ने सामूहिक विवाह योजना में शादी के नाम पर फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया। वायरल वीडियो मामले में सफाई देते हुए अफसरों ने कहा कि कुछ लोग देर से आए थे इसलिए माला पहनकर ही शादी कर ली। जबकि इस योजना में फर्जीवाड़े की बात पर जांच कराने की बात की । मामला शनिवार का है। वीडियो सामने आने के बाद परिजनों ने कहा- खरमास शुरू हो गया है। सहालग आने पर विधिवत शादी कराएंगे। फिर बिटिया को ससुराल भेजेंगे। अधिकारी बोले खुद ही वरमाला पहन लो शादी करने पहुंचे सौरभ (बदला हुआ नाम) ने बताया कि हम लोग 10 बजे गेस्ट हाउस पहुंचे। वहां मौजूद कर्मचारियों ने कहा- सामूहिक विवाह स्थल बदला गया है। हम नए गेस्ट हाउस में पहुंचे, वहां पहुंचने में थोड़ा लेट हो गया, इसलिए विवाह नहीं कराया गया। हम लोगों ने विरोध दर्ज कराया तो कर्मचारियों ने कहा- खुद ही जल्दी-जल्दी वरमाला पहन लो। तब हम लोगों ने खुद ही वरमाला पहन ली । ################## जानकारी के मुताबिक 14 दिसंबर को हुए सामूहिक विवाह के कई वीडियो सामने आए हैं। कानपुर जिले के बिधनू ब्लॉक के वीडियो में वर-वधू खुद ही माला पहनते दिख रहे हैं। माला पहनकर फोटो खिंचवा रहे हैं। जब वीडियो में दिखने वाले जोड़ों से भास्कर ने बात की तो उन्होंने बताया- ब्लाक के कर्मचारियों ने 3 दिन पहले यानी 11 दिसंबर को सामूहिक विवाह समारोह में आने के लिए कहा था। मगर वैरिफिकेशन के बाद लौटा दिया गया। 14 दिसंबर को एक गेस्ट हाउस में शादी के लिए सुबह 10 बजे बुलाया गया। कुछ लोग करीब दो बजे पहुंचे, उस समय शादी समारोह चल रहा था। इसलिए खुद ही माला पहनकर परिजन बोले- सहालग आने पर विधिवत शादी कराएंगे विवाह के बाद 2 दुल्हनें ससुराल की जगह मायके लौट गईं। जब इनके परिजनों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि खरमास शुरू हो गया है। सहालग आने पर विधिवत शादी कराएंगे। फिर बिटिया को ससुराल भेजेंगे। _मांग की जगह माथे पर लगाया सिंदूर_ शिवराजपुर में हुए सामूहिक विवाह में पंडितों ने वर-वधुओं से फेरे लेने का आह्वान करते हुए मंत्रोच्चारण शुरू किया। इस दौरान कई जोड़े फेरे लेने के बजाय वहीं खड़े हो गए।
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