ओड़वारा में लगी निः शुल्क कैंसर जांच शिविर

Oct 25, 2024 - 22:31
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ओड़वारा में लगी निः शुल्क कैंसर जांच शिविर

इशिका गुप्ता INewsUP

बस्ती । प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र , ओड़वारा के परिसर में शुक्रवार को 10 से 3 बजे तक हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर अस्पताल एवं शोध संस्थान, गीता वाटिका, गोरखपुर द्वारा नि:शुल्क कैंसर की प्राथमिक जांच एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया जिसमें जांच के लिए आए सभी 106 लोगों की कैंसर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. सी. पी. अवस्थी ने सहायक चिकित्सक डॉ. राकेश श्रीवास्तव की मदद से कैंसर संबंधित लक्षण की जांच कर उचित परामर्श एवं निशुल्क दवाई दी गई। कैंसर के प्रकार एवं उनके लक्षण के दुर्दांत रोग कैंसर के विषय में मरीजों एवं उनके परिजनों को प्रशिक्षण तथा इलाज के बारे में जानकारी दी गई। अधिकांश ग्रामीण महिलाएं डॉक्टरों के पास जाने से बचती हैं इसलिए खासकर गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों को और ग्रामीण लोगों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना महत्वपूर्ण है जो कि इस अस्पताल का उद्देश्य है। कैंसर जागरूकता अभियान के तहत इस केंद्र से संबंधित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं तथा अस्पताल में आए लोगों को बताया गया कि कैंसर मूल रूप से एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर की कोशिकाओं का असामान्य विकास होता है जो शरीर के विभिन्न भागों में फैल जाता है। यह शरीर के एक हिस्से में उत्पन्न होता है और इसमें विभिन्न अंगों में घुसने की क्षमता होती है। अगर इस बीमारी का प्रारंभिक अवस्था में पता लग जाता है तो यह रोग ठीक हो सकता है। जैसे जैसे समस्या की गंभीरता बढ़ती जाती है इससे निपटना कठिन होता जाता है। अगर कैंसर की स्थिति दर्दनाक है तो इसके उपचार करने के लिए इस्तेमाल तरीके भी समान रूप से पीड़ादायक हैं। इसलिए सतर्क रहना और समस्या को पहली बारी में उत्पन्न होने से पहले दूर करना महत्वपूर्ण है। इसके लक्षणों को पहचान कर इसकी अनदेखी करना भी बहुत बड़ी भूल है। भारत में मौखिक कैंसर की उच्च घटना पान (तंबाकू के साथ या बिना) चबाने, धूम्रपान और शराब के उच्च प्रसार के कारण है। हमें इनके सेवन से हमेशा बचना चाहिए। लगातार खांसी में खून आना, आंत्र की आदतों में बदलाव, मल में खून आना, अस्पष्टीकृत एनीमिया (कम रक्त गणना) , स्तन में गांठ या स्तन से स्राव, अंडकोष में गांठें पेशाब में बदलाव, पेशाब में खून आना, तीन से चार सप्ताह से अधिक समय तक गला बैठना, लगातार गांठें या सूजी हुई ग्रंथियां, तीन से चार सप्ताह से अधिक समय तक मस्से या तिल में स्पष्ट परिवर्तन, बड़े तिल या बहुरंगी तिल जिनके किनारे अनियमित हों या जिनमें खून बह रहा हो, अपच या निगलने में कठिनाई, असामान्य योनि से रक्तस्राव या स्राव, अप्रत्याशित वजन घटना, रात को पसीना आना, या बुखार, मुंह में ठीक न होने वाले घाव या मसूड़ों, जीभ, या टॉन्सिल पर लगातार सफेद या लाल धब्बे, गंभीर असहनीय सिरदर्द जो सामान्य से अलग महसूस हो, अधिक समय तक पीठ दर्द, पेल्विक दर्द, सूजन, या अपच आदि कैंसर का संकेत हो सकता है । ऐसे में कैंसर के चिकित्सक को जरूर दिखाना चाहिए ताकि पता लगकर अगर कैंसर हो तो उसका तुरंत एवं उचित इलाज हो सके। शिविर में महिलाओं को स्तन परीक्षण की स्व-तकनीक बताई ताकि वह हर 15 दिन पर खुद जांच करती रहें और यदि कोई गांठ या सीने में दर्द होता है तो तुरंत एक कैंसर चिकित्सक से मिले ताकि उसका सफल इलाज हो सके। 30 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को कैंसर, विशेष रूप से गर्भाशय ग्रीवा और स्तनों के लिए परीक्षण करना चाहिए, क्योंकि प्रारंभिक युवी अवस्था में निदान होने पर यह पूरी तरह से ठीक हो सकता है। कैंसर में बचाव ही सबसे उपयुक्त ईलाज है। शिविर में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. नीलम चौधरी, अजय श्रीवास्तव, जगदंबा चौधरी, सत्यवती तिवारी, नारद मुनि, सिद्धार्थ, सुनील मिश्रा, रीना, रामसूरत सिंह, सूर्यप्रकाश, स्वास्थ्य केन्द्र के डॉक्टर एवं कर्मचारियों आदि का कार्य विशेष उल्लेखनीय योगदान रहा। ।

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