बारिश से तटबंधों की मरम्मत ठप ,कई गांवों को ले डूबेगी बाढ़ खंड की लापरवाही--
संदीप चौरसिया-कुदरहा बस्ती INewsUP
हुआ वही जिसका डर था ! सरयू के किनारे बने तटबंधों की मरम्मत का कार्य पूर्ण नहीं हो सका। तीन महीने तक बाढ़ खंड सिर्फ दावा करता रहा और इधर मानसून ने दस्तक दे दी। एक दिन पहले हल्की बारिश और दूसरे दिन शुक्रवार को झमाझम बारिश के चलते तटबंधों का मरम्मत कार्य ठप हो गया। कुछ पुराने ठोकरों की अभी मरम्मत नहीं हुई है तो कुछ नए ठोकर और नोज का निर्माण बीच में रोकना पड़ा। इधर, नदी भी तटबंध और कुछ गांवों के समीप से होकर बहने लगी है। इससे ग्रामीण दहशत में हैं। शासन ने इस बार लोगों को बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लिए 36 करोड़ की परियोजना स्कीकृत की थी। इसमें दुबौलिया क्षेत्र के सबसे संवेदनशील चांदपुर-कटरिया और गौरा-सैफाबाद तटबंध पर स्पर, ठोकर, नोज निर्माण के साथ मिट्टी का कार्य प्रस्तावित था। इन कार्यों को पूर्ण करने की तिथि 15 जून निर्धारित की गई थी। कार्यदायी संस्था बाढ़ खंड शुरू से ही मरम्मत कार्य को तेज गति नहीं दे पाया। एक माह पहले डीएम ने तटबंधों के निरीक्षण के दौरान समय के अंदर मरम्मत कार्य पूरा कर लेने की चेतावनी दी थी, लेकिन बाढ़ खंड के अफसरों पर इसका कोई असर नहीं दिखा। इधर, बारिश भी शुरू हो गई। दो दिनों से दोनों तटबंधों का मरम्मत कार्य ठप हो गया है। गौरा-सैफाबाद तटबंध के मोजपुर गांव के सामने नए ठोकर का निर्माण अधर में लटक गया। बारिश के वजह से काम बंद करना पड़ा। जिससे तटबंध और नदी के बीच स्थित मोजपुर गांव में बाढ़ का खतरा फिर मंडराने लगा है। ठोकर निर्माण से इस गांव को सुरक्षित किया जा सकता है। वहीं गौरा गांव के सामने बनाए जा रहे दो ठोकरों का निर्माण भी पूर्ण नहीं हुआ है। मोजपुर निवासी अजीत ने बताया कि नदी की धारा गांव से सट कर बह रही है। कटान कब शुरू हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है। यहां नए ठोकर का निर्माण कार्य बहुत देर में शुरू किया गया। अब बारिश होने लगी तो आधे-अधूरे स्थिति में निर्माण ठप कर दिया गया। विधा देवी ने बताया कि गांव से सटकर बह रही सरयू नदी की लहरें रात को जब आवाज करती हैं तो नींद गायब हो जाती है। कटान होने का डर बना रहता है। पिछले बार भी बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ी थी। इस बार यदि ठोकर बन गया होता तो हम सुरक्षित रहते, लेकिन विभाग की लापरवाही से निर्माण नहीं हो पाया। वहीं चांदपुर-कटरिया तटबंध के कुछ नोज और ठोकरों पर मिट्टी की बोरियों को डालने का काम भी बारिश की वजह से बंद करना पड़ा है। यहां भी नदी लगभग एक किलोमीटर की दूरी में तटबंध से सटकर बह रही है। पुराने ठोकर टूटे तो डूब जाएंगे कई गांव , गौरा-सैफाबाद तटबंध पर पिछले वर्ष बनाए गए ठोकरों की मरम्मत इस बार नहीं कराई गई। जिससे इन ठोकरों की स्थिति जर्जर है। यह ठोकर नदी के बढ़े हुए दबाव को नहीं झेल पाएंगे। जिससे टकटकवा, शुक्लपुरा, बैरागल, तिवारीपुर और मोजपुर के ठोकर निर्माण न होने से नाऊपुरवा, कनघुसरा, उमरिया आदि गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा। तटबंधों के मरम्मत का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। कुछ जगहों थोड़ा बहुत कार्य रह गया है जिसे पूरा कर लिया जाएगा। बारिश की वजह से कार्य ठप हुआ है। मौसम अनुकूल होते ही शेष कार्य पूरे कराए जाएंगे। -दिनेश कुमार, एक्सईएन, बाढ़ खंड। *एसडीएम हर्रैया ने किया तटबंध का निरीक्षण* एसडीएम हर्रैया गुलाब चंद्र ने अतिसंवेदनशील कटरिया-चांदपुर तटबंध का शुक्रवार को निरीक्षण किया। वह खलवा गांव के निकट बनी बाढ़ चौकी पर पहुंचे। यहां उपस्थित बाढ़ खंड के सुपरवाइजर संदीप चतुर्वेदी से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि नदी के जलस्तर पर नजर बनाए रखें। कहीं पर तटबंध या ठोकर क्षतिग्रस्त पाया जाए तो इसकी सूचना तत्काल प्रसारित की जाए ताकि तुरंत बचाव कार्य शुरू किया जा सके। उन्होंने अशोकपुर, कटरिया आदि तटवर्ती गांवों के प्रधानों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया।
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