गोलघर,असुरन,पांडे हाता, उर्दू बाजार व साहबगंज में ट्रैफिक व्यवस्था राम भरोसे
सोमनाथ चौहान INewsUP
गोरखपुर। गोरखपुर का हृदयस्थली कहे जाने वाले गोलघर की सड़कों पर वाहनों की लंबी कतार व पांडे हाता,उर्दू बाजार आदि स्थानों पर जाम गोरखपुर के ट्रैफिक व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं । गोलघर में जीडीए द्वारा बनाया गया पार्किंग शोपीस बन कर रह गया । वाहन चालक अपनी गाड़ियां को सड़कों पर खड़ा कर शॉपिंग करने चले जाते हैं तथा ट्रैफिक पुलिस नदारत रहती है । खानापूर्ति के लिए ट्रैफिक पुलिस कार्रवाई वाहनों पर करती जरूर है लेकिन गाड़ियों को पहचान कर गाड़ियां उठाकर यार्ड में ले जाकर खड़ी कर देती है । अगर वीआईपी गाड़ी रोड पर खड़ी है तो उसे कोई छू नही सकता है और ट्रैफिक पुलिस नजरअंदाज कर चली जाती है । नतीजा सड़कों पर जाम की समस्या बनी रहती है । ट्रैफिक समस्या को समाप्त करने के लिए सीसी कैमरे का जाल बिछाया गया है जिसकी निगरानी कंट्रोल रूम से किया जाता लेकिन कंट्रोल रूम में बैठे कर्मचारी व अपने ऑफिस में बैठे अधिकारी केवल खाना पूर्ति करने में सफल रहते हैं । त्यौहारों के सीजन में अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस की जरूरत पड़ती है लेकिन उसकी जरूरत अधिकारी महसूस नहीं करते जिसका नतीजा यह होता है कि गोलघर सहित काली मंदिर से लगाए असुरन चौक तक वाहन रेंगते हुए चल रहे खाना पूर्ति करने के लिए धर्मशाला पुल के पास पॉलिटेक्निक के सामने ट्रैफिक पुलिस का एक वाहन खड़ी दिखाई देता है जहां ट्रैफिक जवान खाना पूर्ति के लिए सिर्फ खड़े रह कर अपने दायित्वों का बखूबी निर्वहन करते हैं अगर यह ट्रैफिक के जवान अपने दायित्वों का बखूबी निर्वहन करते हुए रेंग रही वाहनों को सुचारू रूप से संचालित करने में अपना योगदान देते हैं तो इन वाहनों को रेंगना नहीं पड़ता फर्राटे से गाडियां दौड़ती हुई रहती यह काम सीसी कैमरे से निगरानी कर रहे कंट्रोल रूम को भी नहीं दिखाई देता कि हमारे किस रोड पर वाहन रेंग रहे कौन से रोड कहां जाम है हैरानी की बात तो यह है कि ट्रैफिक समस्या का हल करने के केवल दावे होते है और सच्चाई यह है कि समस्या की तरफ किसी का ध्यान ही नहीं जाता। हालात यह बने हुए है कि शहर के कुछ बाजार ऐसे है जहां से बिना जाम में फंसे आप गुजर ही नहीं सकते अगर कोई पांडे हाता उर्दू बाजार साहब गंज चला गया तो राम भरोसे आप कब अपने गंतव्य पहुंचेंगे यह कोई नहीं जानता। ऐसा ही काली मन्दिर से असुरन तक सबसे बुरे हालत हैं। पांडेय हाता, उर्दू बाजार, साहब गंज वैसे तो यह बाजार थोक व्यापारियों का हब माना जाता है लेकिन अब ट्रैफिक जाम की जननी बन चुका है। प्रशासन के आदेश है कि दिन में बड़े वाहन बाजार में दाखिल नहीं हो सकते पर इसी साहब गंज बाजार में सारा दिन बड़े व कामर्शियल वाहन दाखिल होते हुए आम तौर पर देखने के लिए मिलेंगे। इन चालकों से न कोई पूछने वाला है, न कोई समस्या का हल करने वाला। शहर में ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के दावे करते नहीं थकते। मगर, सभी दावों के उलट शहर में दिन प्रतिदिन ट्रैफिक व्यवस्था चरमराती जा रही है तेव्हारी सीजन में या यूं कहें कि ट्रैफिक व्यवस्था रामभरोसे है।
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