ढढ़वा ताल को सुंदरीकरण का इंतजार, बनना था पर्यटन स्थल

Nov 15, 2023 - 12:21
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ढढ़वा ताल को सुंदरीकरण का इंतजार, बनना था पर्यटन स्थल
ढढ़वा ताल की हकीकत बयां करती तस्वीर

सुग्रीम-पौली  INewsUP

धनघटा: संतकबीर नगर ।  धनघटा के पास  स्थित ढढ़वा ताल को सुंदरीकरण का इंतजार है। यहां सांसद रहे दिवंगत शरद त्रिपाठी ने इस ताल को पर्यटन की दृष्टिकोण से विकसित करने के लिए पहल की थी। इसके लिए शासन के पास प्रस्ताव भेजा था। लेकिन यह ठंडे बस्ते में है। इनके बाद के जनप्रतिनिधि और अधिकारी इसके विकास को लेकर उदासीन है। यदि यहां पर कमल की खेती को बढ़ावा मिले तो काफी बदलाव आ सकते हैं। किसान कम लागत में अधिक मुनाफा पा सकेंगे। रोजगार के अवसर सृजित होंगे केंद्र में प्रदेश की सरकार नकदी खेती को बढ़ावा दे रही है। वहीं धनघटा क्षेत्र स्थित ढढ़वा ताल, में कमल की खेती से मुनाफे की असीम संभावनाओं के बाद भी इसके प्रस्ताव धूम फांक रहे हैं। यदि इसकी खेती को बढ़ावा मिले तो बकौली कला, धनघटा, टेम्हा, लहूरेगांव सहित बारह, गांव के किसानों की आर्थिक स्थिति में बदलाव आ सकता है। कमल की फसल सिर्फ तीन से चार माह में तैयार हो जाती है। अच्छी उपज के लिए नमीयुक्त मिट्टी उपयोगी होती है।गढ़वा ताल की मिट्टी इसके लिए काफी उपयोगी मानी जाती है। इसकी खेती छायादार स्थान पर नहीं की जा सकती ज्यादा ठंड भी इसकी फसल को नुकसान पहुंचती है।क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक धनघटा तहसील, बगही गांव, में कृषि विज्ञान केंद्र है यहां के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर अरविंद कुमार सिंह, ने कहा कि कमल के बीच या कमल की कमल को तालबेट गड्ढे में डाल देना चाहिए पानी से भरे ताल में कमल के फसल का विकास तेजी से होता है इसकी फसल अक्टूबर तक तैयार हो जाती है इसके बाद फसल की तुड़ाई की जाती है इसमें ज्यादा पूंजी की जरूरत नहीं होती है पांच से छः हजार पौधे 1 एकड़ में लगते हैं। इस पर खर्च पच्चीस से तीस हजार रूपये होता है। कमल के फूल के अलावा बीज के पत्ते व कमल गट्टे भी बिकते हैं। इस प्रकार कमल से तीन प्रकार आमदनी होती है। लगभग दो लाख रूपये, तक मुनाफा कमाया जा सकता है।

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